ढोलकपुर का राजा
ढोलकपुर का राजा
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बजने लगा बड़ी ज़ोर से बैंड बाजा
बड़ी शान में निकले ढोलपुर के राजा
सीना चौड़ा के...कितना पेट फुला के
महीनो बाद निकले करने तकाज़ा
बचपन से सुनी लोकोक्ति याद आयी
कुछ ऐसे ही है ढोलकपुर का राजा
जैसे हो अँधेर नगरी चौपट राजा
टका सेर भाजी टका सेर खाजा।
पसंद हैं राजा को मुखोटे में ढके गुलाम
जो उसकी ही शान में पढ़ते रहे कलाम
हवाई बातें करता,मानो घोडा बिन लगाम
बेफिक्र ज़िन्दगी जीता लाख होता बदनाम
परेशान है प्रजा...कितना ज़ालिम ये राजा
कुछ ऐसे ही है ढोलकपुर का राजा
जैसे हो अंधेर नगरी और चौपट राजा
टका सेर भाजी टका सेर खाजा।
