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Anil Kumar soni

Others

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Anil Kumar soni

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बरसात के दिन

बरसात के दिन

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घनघोर घटाएं बरस रहीं,

बादल बिजली तड़क रही।

नदी नाले उफन रहे,

टर टर मेंढक कर रहे।


प्राकृतिक रचना अद्वितीय,

सृष्टि नजारा विशिष्टता लिए।

हर नज़ारा रहस्यमयी,

मनोभावन दुर्लभता लिए।


पल-पल रंग बिरंगे बादल,

हर छण नज़रे बदल रहा,

टप टपाती बंदे बरस रहीं

प्राकृतिक सौंदर्य झलक रहा।


मोर पपीहा, शोर गूंजायमान,

तड़-तड़ा रहे बादल घमासान,

व्याकुलता मन धड़कन बढ़ा रही

बिजली प्राकृति सौंदर्य बढ़ा रही।


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