मात पिता की मेहनत
मात पिता की मेहनत
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मात पिता की मेहनत जिंदगी की कमाई हमारा घर है।
जिसमें उनका श्रम खून पसीना लगा वह हमारा घर है।।
कच्चा पक्का जैसा भी है मूरत पिता की दिखती है।
हर दीवारों में श्रम खून पसीना लगा सूरत दिखती है।।
जिन्होंने हमें जन्म दिया उनकी यादें इस घर में हैं।
टाइल्स जड़ित घर नहीं फिर भी सोने जैसे हर पल हैं।।
अनमोल विरासत माता-पिता की कैसे छोड़ चले जाएं।
पैसों के खातिर नयी दुनिया अलग से हम क्यों बनाएं।।
अभाव हर जगह हमेशा रहेगा भरपाई हो नहीं सकती।
मात-पिता की यादों से हटकर श्रेष्ठ जगह हो नहीं सकती।।
