विरासत कौन संभालेगा
विरासत कौन संभालेगा
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पदों की बुलंदियां मदहोश शराबी की तरह बना देती हैं
वास्तविक रूप मानवीयता को भुलाकर कठोर बना देती हैं।।
सत्ता के घमंड में मदमस्त हाथी की तरह उसे चाटुकारों के अलावा कोई दिखता नहीं
लाभ अर्जित करता पुराने रिश्ते उसे दिखते नहीं।।
अपना कोई दिख जाए तो मुंह फेर लेता हैं बनावटी जीवन का भेद न खुल जाए ऐसा खेल खेलता हैं।।
कितना चलोगे कितना बढ़ोगे एक ना एक दिन तो जरूर थकोगे
जिन ऊंचाइयों पर आज गर्व किया करते हो कल अवश्य रोया करोगे।।
आज जो आगे पीछे भटक रहे हैं और माई बाप कह रहे हैं कल जर्जर शरीर होगा
जो आज के खास है उन्हें छोड़ दीजिए अपना भी दूर होगा।।
