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सामंत कुमार झा 'साहित्य'

Others

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सामंत कुमार झा 'साहित्य'

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बिना इन्टरनेट का दुख

बिना इन्टरनेट का दुख

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इन्टरनेट के बिना डिब्बा हुआ स्मार्टफोन,

अब मनोरंजन का सहारा बनेगा कौन।


सोशल मीडिया पर क्या हुआ कैसे करे पता,

बिना इन्टरनेट हम क्या करें कोई दे बता।


सारा दिन सेल्फी खींचू करूँ कहाँ अपलोड,

करूँ कैसे अब कुछ अपने लिए डाउनलोड।


इन्टरनेट बिन क्या करूँ समझ न आए यार,

इन्टरनेट बंद है अब तो जिंदगी हुई बेकार।


कोई भी समस्या हुई तो अब कहाँ जायेंगे,

गूगल के बिन परेशानी का हल कैसे पायेंगे।


कुछ खरीदना हुआ तो कैसे करेंगे खरीददारी,

ये तो बड़ी मुसीबत है समझ न आए इस बारी।


क्या करें हम ऐसा कैसे परेशानी हम सुलझाएं,

गूगल ही नहीं है परेशानी का हल कैसे पाएं।



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