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Vijay Kumar parashar "साखी"

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Vijay Kumar parashar "साखी"

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बिन आपके

बिन आपके

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सांसे भी अच्छी नहीं लगती है बिन आपके

ये हवा भी ज़हरीली लगती है बिन आपके,


होशोहवाश में अब नहीं रहते हैं बिन आपके

सामने से कोई गुजरता है ,पता नहीं चलता है,


ख़ुद से ही हम तन्हा हो गये हैं बिन आपके

अब तो हम अपनी सांसो से ही जलने लगे हैं,


जब भी कोई ख्याल न आता हो बिन आपके

मेरा खाना,पीना सब छूट गया है बिन आपके,


जल्दी से पास चली आओ ना मेरी साकी,अब

ये दिल भी रोकर लहू बहाने लगा है बिन आपके,


कहीं ये मेरा दिल बेचारा जीते जी ही न मर जाये,

कफ़न ओठकर कहीं मरने के बाद भी तड़प न जाये,


जल्दी से इसमें अपना घर बना लो न साखी

ये दिल कई जन्मों से ख़ाली है बिन आपके।



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