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Anand Kumar

Others

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Anand Kumar

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भूमिका

भूमिका

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भूमिका जो भी तुमने निभाई 

दक्षता सब मे तुमने दिखाई, 

जीवन के, अनंत, नील गगन में, 

सदैव सजल उषा सी तुम छाई । 


तुमने भूमिका जब जननी का निभाया, 

संसार समस्त ने अपना अस्तित्व पाया ।


जब-जब तुम बनकर आई अनुजा,

सहयोगी तुम सा न मिल सका कोई दूजा ।


जब सखी रूप में तुमको पाया,

तभी, मार्गदर्शन सर्वोत्तम मिल पाया ।


फिर तुम प्रेमिका बन कर आई,

जीवन रथी की भूमिका तुमने निभाई ।


जब दायित्व तुमने गृहणी का उठाया,

गृह को तुमने, स्वर्ग सदृश बनाया ।


तुम आई, लेकर अर्धांगिनी की भूमिका,

तुमने, जीवन का हर क्षण सुन्दर बनाया । 


जब तक जग में, है सूर्य प्रकाशित 

जब तक चंद्र कर रहा, प्रदान शीतलता,

आवश्यक हो जग को तुम, अंत तक  

समय के, तुम पर ही है, अस्तित्व आश्रित ।।


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