STORYMIRROR

Nidhi Sehgal

Others

3  

Nidhi Sehgal

Others

बारिश

बारिश

1 min
252

उफनते बादलों में तब स्याह रंग ने दी परछाई,

हवाओं ने दिशाएँ बदली, शाखाओं की पाती लहराई,

शुष्क धरा से भी कुछ अनछुई बूंदें तब जा टकराई,

अलसाई बारिश ने जब ली सुबह की मीठी अंगड़ाई।


निष्छल नाव भी गलियों में तैरने को है तैयार,

यौवन के सतरंगी सपने भी चाहें एक बौछार,

भीगते तन की गीली पलकें भी हैं कुछ शरमाई

अलसाई बारिश ने जब ली सुबह की मीठी अंगड़ाई।


सभी अन्नदाताओं की बुझती आशा को किरण मिली,

सौंधी खुशबू से हर घर के आंगन की मिट्टी खिली,

मेघ ने अपने अश्रु बिन्दु से जन मन की है तृषा मिटाई,

अलसाई बारिश ने जब ली सुबह की मीठी अंगड़ाई।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन