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जी सर; अक्सर..
जी सर; अक्सर..
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© Anupam Tripathi

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जी सर; अक्सर..

अक्सर; मैं थक कर
कवितायें लिखता हूं
अक्सर; उदासी रचकर
तरो -- ताजा दिखता हूं .

 

अक्सर; इक याद
मुझसे टकराती है
अक्सर; आँखों में 
नदी छलक आती है.

अक्सर; सोचता हूं: मैं 
कि; क्या कह गई : हवा!
अक्सर; ज़हर बन जाती है
दर्द ----- निवारक ----- दवा.

अक्सर; मैं आईनों से
बच कर गुजरता हूं 
अक्सर; आईने के सामने
बे ------ तरह चटखता हूं .

अक्सर; लोग सूरज को
जेब में लिए घूमते हैं 
अक्सर; जुगनूओं के सहारे
खोए दिनों को ढूंढ़ते हैं .

अक्सर; लहरें........ 
नदी का साथ छोड़ 
किनारों पर सिर पटकतीं हैं 
अक्सर; तूफानों में सीना 
ताने
चट्टानें; ओस से दरकतीहैं.

अक्सर; मैं एकान्त में 
बहुत मुखर हो जाता हूं 
अक्सर; किसी समारोह में 
खुद को अकेला पाता हूं .

अक्सर; दोपहर झुंझलाकर
सूरज को मुँह चिढाती है
अक्सर; ऊनींदी रात में 
चाँदनी लोरी सुनाती है.

अक्सर; मैं कपड़े उतारकर 
खामोशी ओढ़ लेता हूं
अक्सर; खुद से डरकर
आईना तोड़ देता हूं .

अक्सर; मैं थक कर
कवितायें लिखता हूं
अक्सर ; उदासी रचकर
तरो -- ताजा दिखता हूं .
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ANUPAM TRIPATHI HINDI POETRY AKSAR REAL LIFE HAPPENING

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