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जीएसटी पर कविता (अवधी)
जीएसटी पर कविता (अवधी)
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© Awneesh Kumar Shukla

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हाँ ! भइया जीएसटी आई है

सुना भाय जीएसटी आई है।

साहब कहत हैं गुड़ और सिंपल 

पर हमका लागथै बहुतै टिपिकल

औ साहब के मन का लुभाई है।

हाँ ! भइया जीएसटी आई है

सुना भाय जीएसटी आई है।।

अरुण जेटली दिहिन बताई

ई तौ नवा कानून है भाई

व्यापरियन कै व्यापार बढे खुब

सीए,वकील कै बढ़े कमाई

हमका बात पचत नाहीं है 

अउरौ के समझ न आई है

हाँ! भइया जीएसटी आई है

सुना भाय जीएसटी आई है।।

पप्पू भइया दिहिन सुनाई 

ई तौ गब्बर सिंह टैक्स है भाई

जनता कै नुक्सान बहुत है

व्यापरियन कै बहुतै खिंचाई है

हाँ ! भइया जीएसटी आई है

सुना भाय जीएसटी आई है।।

पेट्रौल,शराब कै दिहिन हटाई

कपडा - लत्ता कै दिहिन बढ़ाई

महिला के नाउ पै सरकार बनाइन

अब पैडवौ पै जीएसटी लगाई है।

हाँ ! भइया जीएसटी आई है

सुना भाय जीएसटी आई है।।

सीए साहब कहत हैं भाई

रिटर्न भर-भर के गयन अकुलाई 

आगेव फिर बदलाव के बारे

मीटिंग पै मीटिंग बुलाई है।

हाँ ! भइया जीएसटी आई है

सुना भाय जीएसटी आई है।।

     

        

कविता व्यंग्य जनता

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