Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
-:गुमनाम:-
-:गुमनाम:-
★★★★★

© Prakash Yadav

Others

1 Minutes   20.4K    7


Content Ranking

कहाँ गुमनाम

हो गई अचानक

मेरी दुनिया से

कहा करती थी

ताउम्र निभाऊँगी

रिश्ता तुम्हारे साथ

चाहे तुम जहाँ जाओ

कुछ माँगा भी तो नहीं

न मैंने तुमसे 

न तुमने मुझसे

बस छोड़ दिया

एक दूसरे पर

देने को सबकुछ

बहुत पीड़ा हुई थी

उस वक़्त छोड़ते हुऐ

तुमको और तुम्हारे शहर को

कुछ दिनों तक ही तो

चला सिलसिला गुफ़्तगू का

दरमियान हमारे

उस दिन के बाद

और फिर आज तक

न तुम्हारा फोन

न कोई संदेश

न तुम्हारी उपस्थिति

फ़ेसबुक अथवा

किसी अन्य माध्यम से

न तुमने कोई पता दिया

जिस पर लिख सकूँ

मन की बात को

कह दूँ तुमसे

तुम्हारा कहा हुआ

वो हर एक लफ़्ज़ 

जिस पर यक़ीन

मुझे ही नहीं तुम्हें भी था

गुज़ारे हुऐ उस

यादगार वक़्त के साथ ...........

                  प्रकाश यादव “निर्भीक”

                  बड़ौदा – 16-09-2015

 

-:गुमनाम:-

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..