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संस्कार

संस्कार

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जैसै ही ट्रेन बरौनी स्टेशन पर रूकी,माँ ने एक बैग मुझे दे दी।

"जल्दी चल" मोहन इंतजार कर रहा होगा"

हम चार साल बाद बिहार आये थे।

स्टेशन पर साफ-सफाई पहले से बेहतर थी,ब्रिज भी बन गया था,ब्रिज उतरने के बाद हम पत्रिका के स्टॉल पर गए,जहाँ से पत्रिकाएँ खरीदती थी।पत्रिका वाले नाना मुझे नहीं पहचान पाए पर मम्मी को तुरंत पहचान गए।जब हमारी ट्रेन होती थी मैं इनके बगल में बैठकर पढ़ती कम पन्ने ज्यादा पलटती।इनसे खूब बातचीत हुई।और बाहर आए।

हम शॉक्ड रह गए।हमारे स्वागत में सारी पलटन ही हाजिर है,सुनील मामा,मामी,उनके बच्चे बिट्टु और हर्ष सभी आए हैं।मैनै मामा-मामी के पैर छुए,बिट्टु-हर्ष भी बड़े हो गए थे।

"ननद जी आप कितनी दुबली हो गई हैं लगता है जीजा जी खाना कम देते थे" मामाजी ने मजाकिया अंदाज में बोली।

"नहीं-नहीं भाभी,वैसै बात नहीं है दोनो बाप-बेटी हमेशा मुझे खिलाने के चक्कर में रहते हैं कभी पिज्जा कभी बर्गर।ताकि मैं इनदोनो का काम कर सकूँ।

हमलोग कार में बैठकर गाँव पहुँचे।गाँव काफी सुंदर लग रहा था।

पेड़ कम मकान ज्यादा दिखाई दे रहे थे।

मम्मी से मिलने कई लोग आए हैं।

"कैसी हो सुनीता? तुम्हारी बेटी कितनी बड़ी हो गयी है?शादी कब रही हो? बेटा के बारे में नहीं सोचा, बेटी तो आखिर पराया धन होती है।

इनके सवाल सुनकर दिमाग खराब हो गया और नानी के पास जाकर बैठ गयी।

"मधु....देखो कौन आया है? अमित इसे तो अच्छी जानती हो" मामी बोली।

अमित...वो घुघराले बालो वाला,हमेशा हम साथ खेलते थे, मैं उसके स्कूल भी चली जाती और खूब मस्ती करते थे।बचपन की यादे भी कितनी खूबसूरत होती है?

"मधु क्या हुआ नहीं पहचाना मुझे?" अमित बोला।

"हाँ-हाँ याद है बिल्कुल याद है हम साथ साथ खेलते थे।"मैनै छोटा सा जबाब दे दी।

पर मुझे वो बदला हुआ लग रहा था... हाथ में ब्रासलेट...स्टाईलिश बाल ,हाथ में टैटू मुझे अजीब लगा।

कुछ देर में वो चला गया।

"मामी अमित करता क्या है?"मैनै धीरे से पूछा।

"क्या बताऊँ,मुझे भी ठीक ठीक नहीं पता है, सुबह उठकर बाईक लेकर दोस्तो के साथ निकलता है सिर्फ रात को आता है।"

"उसने बाईक कहाँ से लाई" मैनै बीच में टोक दी।

"अरे पापा से जिद कर खरीदवाया"

ओ कितना बदल गया है वो क्या करता है? जो इतना रूपया उड़ाता.है।

आखिर मैं ये सब क्यूँ सोच रही हो। ओ बचपन का दोस्त है न इसलिए।

सुबह उठी नानी के साथ गंगा स्नान कर आई,कलकता मे कहाँ नसीब होता है ये सब.. सुबह उठकर,तैयाल होने के बाद सीधे कॉलेज।

"मधु जानती हो अमित को रात पुलिस पकड़कर ले गए।"मामी जी ने धीरे से कहा।

"क्यूँ?"

"क्योंकि वो शराब का धंधा करने लगा था वो भी होम डिलीवरी"

तभी तो मैं भी सोच रही थी कि इतना रुपया लाता कहाँ से है?

गलत काम एक न एक दिन पकड़ा जाता है, कितने सपने देखे उसके पापा ने,

पर सही संस्कार न दे पाए कि भूखा ही सोना पड़े फिर भी कभी गलत काम मत करना। पता नहीं आज के युवा क्यूँ इतनी शॉटकट रास्ते से सफल होना चाहते हैं पर उन्हे यह भी पता होना जरूरी है कि मेहनत और ईमानदारी से मिली सफलता टिकाऊ होती है।


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