स्कूल के वह दिन
स्कूल के वह दिन
उठा में आ रही जोरों से नींद सोचा सो लेता हूं 5 मिनट से शुरू करूंगा आज का दिन। सुनाई दी एक बात बोली मम्मी उठ जा नालायक स्कूल के लिए हो रहा है इंतजार, अरमान मेरे टूट गए मैं चुपचाप जाकर हुआ तैयार। कपड़े पहने, जूते चमकाए, लगाया बस्ता बिल्कुल कमाल आया फिर खाना खाने का समय यार। खाना खाया पेट भरा मैं थोड़ा आलस में डूब गया सुन बस्ती पी - पी आवाज में बसता उठाकर दौड़ पड़ा। आशीर्वाद लेकर सबका मैं बस में जाकर घुस गया, यारों के संग गप्पे मारते मारते ना जाने स्कूल कब आ गया। उतरे हम सब, मिलकर कक्षा की और है बढ़ रहे कक्षा में देख अध्यापिका को हम खुशी से झूम उठा रहे। बस्ता उतारा, स्थान पर बैठे शुरू किया प्रार्थना का मंत्र, प्रार्थना करके अब आया वक्त करने का पढ़ाई सब के संग। टीचर जी - टीचर जी बोले हर कोई एक संग सुन, अध्यापिका बोली, "क्या है यह बाजार जहां मिलती मछली सब्जी और फल ?"अध्यापिका कि बात सुनकर हम थोड़ा हंसे और फिर चुप हो गए अच्छे से हम कार्य करके खूब प्रसन्न हो उठे। बजी घंटी लंच की, खोला लंच हमने तेजम - तेज यारों ने खाया खाना मिलजुल के बड़े प्रेम से। लंच हुआ खत्म अब अध्यापिका ने किया पढ़ाना आरंभ सुन अध्यापिका की बातें हम हिलाए सिर एकमत में सब । घंटी बजी हुई छुट्टी, चले हम अब घर की ओर बोले टीचर को बाय- बाय, टाटा हम लौटे अब घर में सब।
