वह सर्दियों के दिन
वह सर्दियों के दिन
रात लंबी, दिन बड़े हुए सर्दियां आते ही सब खुश हुए। सुबह उठे, सबके दांत कट कटाऐ, रजाई से कोई कैसे निकल पाए। कैसे-कैसे जोड़ की हिम्मत हम रजाई से खड़े होकर आए, टोपी, मफलर तो जैसे हैं बन गए हमारे गहने भाए। नहाने का नाम मन करे बस करे मन धूप सेंकने का ,कोहरा देखकर कौन जुटाए हिम्मत बाहर जाने का। गरम गरम खाना जैसे लगे बड़ा ही आरामदायक और अगर कोई बोले हमें नहाने को तो वह बन जाए वह हमारा खलनायक। ऊनी कपड़े पहनकर सब लग रहे बड़े सुंदर और प्यारे सर्दियों में आए ना जाने कैसे मौज हमारे। आइसक्रीम बर्फ पर लगे ताले, जलेबी मिठाई खाए हम सब मिलकर और ताल मिला के। कहीं बने चाट पकौड़ी तो कहीं बने बड़ी बड़ी कचौड़ी। बुखार, जुखाम बने दुश्मन तब हमारे, जो भी हो सर्दियों के दिन लगे सबको प्यारे। लगे सबको प्यारे।।
