वह पेपर के दिन
वह पेपर के दिन
हर एक बच्चे ने किया उसे अनुभव है, हर पेपर एक बच्चे का उसके लिए एक मौका है, अपने आप को बताने का, अपनी क्षमता का ज्ञान करवाने का। पेपर भी ना बच्चों की जिंदगी का वह भाग होते हैं जहां वह डरते भी हैं, जीतते भी हैं, खुश भी होते हैं, तो थोड़ा घबराते भी है। पेपर से पहले वाली प्रार्थना कोई क्या भुला है इतना धार्मिक तो कभी शायद ही कोई हुआ है। भगवान को मस्का लगा लगा कर ना जाने कितनों ने अपना काम करवाया है। वह पेपर मिलने के बाद ना जाने क्या-क्या सबको याद आया है। कुछ आते हैं, तो कुछ नहीं, यह सब के साथ ही हुआ खेल है। पेपर देकर दोस्तों के संग किए सब ने उत्तर मैच है कुछ जान के होते खुश तो कुछ थोड़ा घबराए हैं। सोच सब अच्छा अच्छा फिर मुस्कुराए हैं। कुछ बच्चों को बोल पढ़ाकू सबने बातें बनाई है, बोल वह हैं रट्टू तोता सब के संग मुस्कुराए हैं। घर जाकर जब पूछे सब पेपर में क्या करके तुम आए हो, बोल हो जाएंगे पास हम, हम खुशी से भी बौखलाए है। वह पेपर के दिन तो हमें अभी याद है। वह पेपर के दिन तो हमें अब भी याद है।
