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विनीता धीमान

Children Stories

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विनीता धीमान

Children Stories

मेरी नानी टॉफी वाली

मेरी नानी टॉफी वाली

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बचपन कितना अच्छा था ना कोई परेशानी न ही कोई दिखावा... सिर्फ प्यार था जो बड़ो से मिलता था, अपनापन था जो सबसे मिलता था लेकिन अब ज़माना बदल गया है। फिर भी मुझे मेरी बचपन की नानी बहुत याद आती है जो सगी नही थी लेकिन पराई भी नही थी


बचपन के दिन भुला ना देना....

आज हंसे कल भुला ना देना....


यें गाने की लाइन बहुत सुंदर है, बिल्कुल सटीक...


अपने बचपन की यादों को ताज़ा करने के लिए....


मुझे आज भी बहुत अच्छे से याद हैं। हमारी गर्मियों की छुट्टियों में हम सब भाई बहन मामा जी के घर घरौंडा जाते थे। 

सब मोहल्ले के बच्चों के साथ हमारी जान पहचान थी। 

वह सब भी हमारा इंतजार बेसब्री से करते थे। कुछ अपनी नानी के घर जाते तो कुछ आते थे।


लेकिन हमारे खेलकूद सुबह से देर रात तक चलती थी..... जब तक मामा जी आकर.... दो डांट ना लगा दे.... तब तक खेलना। 


फिर रात को ठंडी ठंडी कुल्फी खाना।

देर रात तक घर के बाहर बैठ कर गप्पे मारना......


वो खेल हमे सिर्फ गावों में ही मिलते है जैसे चोर- सिपाही, गिल्ली डंडा, छुपम छुपाई, सांप सीढ़ी, सतोलिया, और शाम के समय हम सब बच्चों का नाच गाने का प्रोगाम। 


इन सब के साथ हमारी दूर के रिश्ते की नानी....


जो रोज शाम को अपनी जेब में टॉफियां लेकर आती थी, संतरे के रस वाली खट्टी मीठी टॉफी। हम सब उन्हें टॉफी वाली नानी कहकर बुलाते थे।


वो रोज आती, अपनी छोटी सी लाठी के सहारे, झुकी हुई कमर, लेकिन उनके चेहरे की चमक आज भी याद है।


हम सब बच्चें उनको घेर लेते सबको टॉफी मिलती। जितनी नानी देना चाहे। ये सब करने में हमे बहुत अच्छा लगता था।


कभी नानी नहीं आती तो हम सब उदास हो जाते। क्या हुआ होगा, नानी आज क्यू नही आई। नानी जी हम बच्चों की जान थी।


आज भी हम जब भी मामा जी के घर जाते है सब मिलते है वहीं मोहल्ला, वहीं बच्चें जो अब बड़े हो गए.. हमारी तरह...।


लेकिन टॉफी वाली नानी नहीं मिलती

उनकी बहुत याद आती है। 


ऐसे ही हमारे बड़ों का प्यार हमेशा याद आता है लेकिन वो हमें दूर से देख रही होगी




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