कौन अपना कौन पराया?
कौन अपना कौन पराया?
किसी समय मालती जी ने अष्टावक्र की कहानी पढ़ी थी राजा जनक की सभा में जब सारे सभासद अष्टावक्र के रूप को देख कर हंसे थे तो उन्होंने राजा जनक से पूछा, इस राजसभा में सारे मोची ही हैं क्या? जो सिर्फ चमड़े के बारे में जानते हैं, कितना सही कहा था मालती जी को रह रह कर वह कहानी याद आ रही थी, और ऐसा लग रहा था राजसभा के सारे लोग पूरी दुनिया में ही फैल गए हैं। अगर ऐसा ना होता तो क्या किसी को नीता में अच्छाइयां ना दिखती। देखते ही देखते नीता 24 साल की होने को आई है । बचपन से मालती जी देख रही है, घर के हर काम में वह सर्वगुण संपन्न थी। कितनी भी परेशानी या काम आन पड़े लेकिन कभी उसके माथे पर बल नहीं देखे गए। अपना घर तो अपना घर , पड़ोस में रहने वाली मालती जी को भी जब भी जरूरत होती थी नीता के बिना उनका काम चलता ही नहीं था। मालती जी के पति की बीमारी में और उनके जाने के बाद जिस तरह से नीता ने घर संभाला था अगर उनकी कोई अपनी बेटी भी होती तो शायद ही इतनी सुघडता से घर संभलता। इन सबके बावजूद उसने अपनी पढ़ाई में भी उसने अच्छे ही नंबर लाए थे। लेकिन सब के द्वारा की जाने वाली उसकी उपेक्षा मालती जी को भी अंदर तक कचोटती थी। क्या कसूर था बेचारी का ? सिर्फ यही ना कि वह अपनी बहन प्रिया के जैसे गोरी चमड़ी की नहीं थी। सिर्फ यही ना कि वह प्रिया के जैसे 5 फुट 7 इंच की नहीं थी । आजकल तो लगभग हर सप्ताह ही उसको तिरस्कार का सामना करना पड़ता था ।लड़के वाले उसे देखने आते और उसकी जगह प्रिया को पसंद करके चले जाते। इस बात का सारा गुस्सा मां सिर्फ नीता पर ही उतारती। प्यार के दो बोल के लिए तरसती नीता जब भी मालती जी के पास आती, वह चाहे कितना भी मुस्कुरा रही हो लेकिन बचपन से देखी हुई नीता के आंसू मालती जी से छिप नहीं पाते थे । वह नीता की मां को बहुत समझाती परंतु नीता की मां अपनी ही परेशानियों में घिरी हुई यही कहती थी ,कि क्या करूं मैं इस नीता के चक्कर में प्रिया और बड़ी हुई जाती है ।डर है कुछ समय बाद कहीं इसके भी रिश्ते आने बंद ना हो जाए ।अगर प्रिया की शादी पहले कर दो तो ? -------आखिर थी तो वह मां ही ना ,ऐसा कर नहीं पा रही थी।
अगले साल तक मालती जी का बेटा विनय भी डिग्री करके घर लौट जाएगा मालती जी को पूरी उम्मीद थी कि विनय की सोच भी उनके ही जैसी होगी, और वह नीता जैसे कीमती हीरे को अपने घर में ही बहू बना कर सजो लेंगे। हालांकि उन्होंने ऐसा नीता की मां से कहा तो नहीं था परंतु फिर भी शायद उन्हें भी कुछ ऐसी ही उम्मीद हो, क्योंकि वह भी रह-रहकर नीता के बारे में हर समय मालती जी से जिक्र करती ही रहती थी
अब जब से पीछे वाले बड़े घर का रिश्ता प्रिया के लिए आया तो नीता की मां उस रिश्ते को ठुकरा ना सकी। नीता को छोड़कर प्रिया की शादी ही पहले करने का उन्होंने फैसला कर लिया था। नीता की आंखों की उदासी मालती जी से छिपी तो नहीं थी उन्होंने नीता को अपने अंक में भर लिया और अपने मन में नीता को अपनी बहू बनाने का दृढ़ निश्चय कर लिया था।
प्रिया की शादी पर बहुत खुश होने का ढोंग रचने के बावजूद भी उसकी उदासी मालती जी महसूस कर रही थी। बस उन्हें तो उस समय का इंतजार था जब विनय पढ़ाई पूरी करके घर वापस आएगा। नीता भी पढ़ाई पूरी करके पास के ही एक प्राइवेट स्कूल में टीचर लग गई थी। पति के मृत्यु के बाद मालती जी ने अपने घर के ऊपर के हिस्से को एक पी.जी में बदल दिया था उसमें ऊपर कमरे में रहने वाले तीनों लड़कों के किराए देने से और कुछ उनके पति की पेंशन से मालती जी के घर का खर्च अच्छे से चल रहा था।
नीता के कारण मालती जी कभी भी अपने आपको अकेला महसूस नहीं करती थी। घर के हर काम में नीता मालती जी का हाथ बंटाती थी। और कभी बहुत जरूरत पड़ने पर ऊपर पी.जी वाले लड़के भी काम आ ही जाते थे। क्योंकि मालती जी को पी.जी वाले तीनों लड़कों के लिए नाश्ता भी बनाना होता था तो कई बार अगर उनकी तबीयत खराब होती थी तो पी.जी में रहने वाला सोनू भी उनकी बहुत सहायता करवाया करता था।
आखिर वह दिन भी आया जब मालती जी के बेटे विनय को पढ़ाई खत्म होने के बाद घर आना था। सांवली सी और छोटे कद की नीता सुंदर सा सफेद रंग का गाउन पहने उस दिन वास्तव में ही परी सी लग रही थी। मालती जी ने बेटे के स्वागत की तैयारी बहुत अच्छे से की थी। नीता ने भी रसोई में लगकर बहुत अच्छे पकवान भी बनाए थे। विनय ने ही आकर मां को एक खुशखबरी और दी कि उसका केंपस सिलेक्शन हैदराबाद में हो गया है और अब वह जल्द ही हैदराबाद चला जाएगा। उसे सैलरी का बहुत अच्छा पैकेज मिला था । मालती जी ने विनय से स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब तुम कहीं भी जाना पर उन्होंने नीता को उसके लिए बहु स्वीकार रखा है इन सर्दियों में नीता से शादी करके ही जाना।
सुनकर नीता तो शर्मा कर अपने घर को भाग गई लेकिन विनय ने स्पष्ट शब्दों में इस रिश्ते के लिए मना कर दिया। वह भी तो उसी दुनिया का ही हिस्सा था, जो कि इंसान की सीरत नहीं सूरत देखते थे। उसने कहा मां मैंने भी एक बेहद खूबसूरत अपने कॉलेज की ही लड़की पसंद कर रखी है। उसकी भी कैंपस सिलेक्शन हैदराबाद में ही हुई है। जाने से पहले मैं उसको आपसे जरूर मिलवाऊंगा। मैं नीता से शादी नहीं कर सकता।
पति के जाने के बाद शायद यह दूसरा झटका था जो कि मालती जी को लगा। नीता के बिना वह अपनी जिंदगी की कल्पना भी नहीं कर पा रही थी। जब से नीता के भाई की भी शादी हो गई और भाभी आने के बाद घर में नीता को अपने घर में भी करने के लिए कोई खास काम नहीं रह गया था तो उसका भी अधिकतम समय मालती जी के घर में ही कटता था। अपने घर के और लोगों के जैसे ही भाभी की आंखों में भी नीता को अपने लिए उपहास ही नजर आता था। सिर्फ मालती जी ही थी जो उसकी दोस्त मां और दुख दर्द समझने वाली सब कुछ थी।
विनय तो मना करके कुछ दिन बाद हैदराबाद चला गया। लेकिन इधर मालती जी और नीता दोनों ही टूट से गए। घर में दोनों के होने के बावजूद भी जो खालीपन पसरा वह दूर होने की अब दूर तक कोई उम्मीद दिख भी नहीं रही थी। विनय भी अपनी जिंदगी में व्यस्त ही हो गया था। फेसबुक पर अक्सर विनय और उसकी दोस्त की फोटो देखने को मिल जाती थी। फेसबुक से ही पता पड़ा कि यह दोनों प्रोजेक्ट के सिलसिले में कुछ महीनों के लिए यू.एस जा रहे हैं।
यह भी मालती जी को विनय ने ही बताया कि वह अपनी दोस्त मीना से ही शादी करना चाहता है ।बेशक दुनिया के सामने आप शादी मेरे आने के बाद अगले साल करें लेकिन हम दोनों में से कोई भी अगर यू.एस में सेटल होना चाहे तो कोई लीगल प्रॉब्लम ना आए इसलिए कोर्ट में मीना के मां-बाप के सामने उन दोनों ने शादी कर ली है।
मालती जी की चुप्पी दिन पर दिन बढ़ती जा रही थी। अब घर के ऊपर रहने वाले तीनों पेइंग गेस्ट के लिए नाश्ता भी बनाना दिन पर दिन मुश्किल होता जा रहा था। विनय ने भी अब हर महीने पैसे भेजने शुरू कर दिए थे और उसने मालती जी से कहा कि अब आपको पेइंग गेस्ट रखने की जरूरत नहीं है। वैसे भी अब तक केवल सोनू को छोड़कर बाकी दोनों लड़के घर छोड़कर जा चुके थे। विनय के यू .एस जाने के बाद मालती जी को एक दिन चक्कर आए और जमीन पर गिरने से उन्हें काफी चोट आई थी। यह तो सोनू और नीता के कारण ही मानो उन्हें नई जिंदगी मिली। उन दोनों ने ही उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया जहां उनके पैरों में फ्रैक्चर होने के कारण प्लास्टर भी लगा।
उनके घर के ऊपर रहने वाले पी.जी . सोनू के पिता ने क्योंकि दूसरी शादी कर ली थी और उसके सौतेले भाई बहन तो थे लेकिन घर में सोनू के लिए कोई जगह नहीं थी इसलिए वह काफी समय से मालती जी के घर के ऊपर ही रहता था और अब जब से मालती जी उठने में भी असमर्थ हो गई वह मालती जी के पास नीचे ही रहने लगा। सवेरे नीता उनका काम करके जाती थी और स्कूल से आने के बाद जब तक सोनू नहीं आ जाता था वह मालती जी का पूरा ख्याल रखती थी।
यही तो अजब गजब परमात्मा का विधान है इंसान सोचता कुछ है, और होता कुछ है। विनय के लिए मालती जी ने हजार सपने सजाए। मालती जी और उसके पति ने घर में हर चीज विनय के हिसाब से ही बनाई थी। हर दिन मालती जी विनय को पढ़ाते हुए उसकी नौकरी करने की राह देख रही थी। सारी उम्मीदें उससे लगाई थी, लेकिन जरूरत पड़ने पर काम कौन कर रहा था? मालती जी से नीता की उदासी देखी नहीं जा रही थी। एक दिन उन्होंने सोनू से कहा क्या वह नीता से शादी करना चाहेगा? सोनू को शादी से कोई एतराज नहीं था बस उसे सिर्फ यही डर था कि अभी वह आर्थिक रूप से इतना सबल नहीं है कि वह घर को चला सके। मालती जी ने नीता की मम्मी से अनुरोध किया कि वह नीता को अपनी बेटी बनाना चाहती है अगर उन्हें कोई एतराज नहीं है तो वह उसे गोद भी ले सकती है।
किसी को कोई एतराज नहीं था मालती जी ने नीता को अपनी बेटी बनाकर सोनू से उसकी शादी करवा दी। अब वह दोनों मालती जी के साथ ही रहते थे ।उस सुनसान से घर में इन दोनों के एक छोटे से बेटे का आगमन होने के बाद चारों और किलकारियां गूंज उठी।
विनय भी अपनी जिम्मेदारी हर महीने पैसे भेज कर पूरी कर रहा था। उसका 6 महीने का प्रोजेक्ट खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था ।वहां रहते हुए उसे लगभग 4 साल हो गए थे। कभी-कभी वह मालती जी से फोन पर भी बात कर लिया करता था।
अभी कुछ दिन पहले ही विनय का फोन आया कि वह और मीना भारत वापस आ रहे हैं। जाने उनका प्रोजेक्ट खत्म हुआ था या रिसेशन के कारण उनकी नौकरी छूटी थी। मालती जी हमेशा के जैसे चुप थी लेकिन अब विनय के आने की खबर सुनकर भी उनकी उत्सुकता इतनी बड़ी हुई नहीं थी। वह अपने घर संसार में बहुत व्यस्त हो गई थी। शायद उनका परिवार ही बदल चुका था जिसमें कि सोनू नीता और बबलू थे।
कुछ दिन बाद जब विनय मीना के साथ आया तो मालती जी बबलू को खिला रही थी। घर पूर्ण रूप से बदल चुका था। विनय का कमरा अब नीता और सोनू का बन चुका था। मालती जी के कमरे में बबलू का एक्स्ट्रा बेड लगा हुआ था। मालती जी ने विनय को गेस्ट रूम में रहने के लिए कह दिया था।
शाम को जब सोनू और नीता आए तो उन्होंने विनय से माफी मांगी और कहा हम आपका कमरा खाली कर देंगे। विनय के साथ मीना ने भी नीता से कहा जी हां, इतनी जल्दी हो सके आप कमरा खाली कर दीजिए क्योंकि अब माता जी की सेवा करने के लिए हम लोग यहां आ गए हैं और अब वापिस नहीं जाएंगे। आप चाहे तो अपना इंतजाम कहीं और भी कर सकते हैं।
विनय ने मालती जी से कहा कि आप अगर अपने विधि विधान से हमारी शादी करवाना चाहती हैं तो कोई सी भी तारीख निकालकर करवा देना। सबको रिसेप्शन भी देना चाहो तो उसका इंतजाम भी हो जाएगा। मालती जी अब भी चुप थीं। सुबह ही सोनू और नीता के जाने के बाद बबलू को खिलाते हुए उन्होंने मीना और विनय को बात करते सुन लिया था । मीना विनय से कह रही थी कि तुम्हारी माता जी को बेवकूफ बनाकर इन लोगों ने तुम्हारे घर पर पहले ही कब्जा कर लिया है। अब तो जितनी जल्दी हो सके हमें इन्हें घर से निकालना चाहिए। उसके बाद हम कोई नई नौकरी ज्वाइन करेंगे। अपना सामान भी उन्होंने गेस्ट रूम में ही रखा हुआ था जो कि अभी तक खोला भी नहीं था।
सोनू और नीता ने विनय से कहा क्योंकि कल रविवार है, हम कल यह आपका कमरा खाली कर देंगे और नया घर मिलने तक गेस्ट रूम में या ऊपर ही कमरे में रह लेंगे। मालती जी जो अभी तक चुप थी बोली तुम दोनों मेरे बच्चे हो, और कहीं नहीं जाओगे। विनय और मीना बाहर से आए हैं अगर यह चाहे तो ऊपर कमरे में रह सकते हैं अगर कहीं बाहर रहना चाहे तो वहां भी जा सकते हैं। इस घर में दोनों का हिस्सा बराबर है और मैं फैसला करती हूं कि मैं सदा अपनी बेटी नीता के साथ रहूंगी। अगर विनय यहां पर रहना चाहता है तो बेशक ऊपर कमरे मैं चला जाए और इसने आज तक जो भी पैसे भिजवाए हैं वह मेरे बैंक में जमा है जब वह चाहे मैं सारे पैसों का चेक इसे लौटा दूंगी । क्योंकि विनय भी मेरा बेटा है इसलिए हक से यह इस घर में रह सकता है । चाहे तो यह अपने और कमरे ऊपर बना ले या उसमें ही रहे या यहां ना रहे यह इन दोनों की इच्छा।लेकिन मुझे अपनी बेटी के साथ यहीं ही रहना है । कहकर मालती जी ने बबलू को गोदी में उठाया और सोने के लिए कमरे में चली गई।
