Prabodh Govil

Children Stories

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जंगल चला शहर होने -14

जंगल चला शहर होने -14

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रानी साहिबा ने अपने मांद महल के एक किनारे पर फूलों का एक बेहद खूबसूरत बगीचा बनवा लिया था जिसमें वो अक्सर चहलकदमी किया करती थीं।

एक दिन वो सुबह सुबह यहीं पर टहल कर ठंडी हवा का आनंद ले रही थीं तभी एकाएक उनकी आंखें चौंधिया गईं। उन्होंने देखा कि एक बेहद खूबसूरत ताज़ा खिले फूल पर एक सोने की प्यारी सी चेन झूल रही है।

"हां हां, कोई संदेह नहीं। चेन शुद्ध सोने की ही थी।" मिट्ठू पोपट ने खुद वहां आकर उसकी जांच कर उन्हें बताया।

इस बात की ख़बर जब राजा साहब को मिली तो उन्हें ज़रा भी खुशी नहीं हुई।

वे सोचने लगे - ये क्या तरीका है, अगर किसी को हमें उपहार देना भी है तो उसे सामने आकर ख़ुद इसे हमें भेंट करना चाहिए था। इस तरह छिप कर भेंट देना, और वो भी बगीचे के फूलों में रख देना भला क्या शोभा देता है?

लोमड़ी ने दबी ज़ुबान से राजा साहब को और भड़का डाला। बोली - अरे, उपहार देने वाले को इतना तो मालूम होना ही चाहिए कि आप फूलों को नहीं देखते। वहां तो सिर्फ़ रानी साहिबा की निगाह ही जा सकती है। तो क्या उपहार रानी साहिबा के...

तभी खरगोश ने इशारे से लोमड़ी को चुप कर दिया वरना राजा साहब का क्रोध और भी बढ़ कर न जाने कहां जाता।

राजा साहब इस घटना पर चाहे जितने लाल पीले हुए हों पर रानी साहिबा का तो इससे दिल बाग बाग हो गया। वह हुमक कर बोलीं - जेडमिट्ठू जी, क्यों न हम सारे में ये ढिंढोरा पिटवा दें कि सभी लोग मांद महल के बगीचे में उगे फूलों को इसी तरह सजाएं। जो अपना फूल सबसे सुंदर तरीके से सजाएगा उसे राजा साहब ईनाम देंगे।"

"हां, यह भी कहलवा दीजिए कि फूलों को सोने, चांदी, हीरे ,मोती, जवाहर,माणिक, नीलम,पन्ना,लाल आदि किसी से भी सजाया जा सकता है! " रानी साहिबा ने आदेश दिया।

जिराफ़ की मॉल का काम अब तेज़ी से चल रहा था। वह दिनोंदिन ऊंची होती जा रही थी। इसी बीच एक दिन जिराफ़ की मुलाकात गेंडे बाबू से हो गई जिन्हें सब राइनो सर कहते थे। राइनो सर ने जिराफ़ से कहा कि "यदि तुम तीन दिन के भीतर अपनी मॉल की छत तैयार करवा लो तो तुम्हें तत्काल लाखों की आमदनी हो सकती है।"

"वो कैसे?" जिराफ़ की आंखों में ये सुनते ही चमक आ गई। वह राइनो सर के और करीब खिसक आया ताकि उनका प्लान कोई और न सुन ले। आखिर दीवारों के भी कान होते हैं। और किसी के बनते हुए काम में कोई बखेड़ा डाल कर बाधा पहुंचाना तो लोगों के बाएं हाथ का खेल है।

राइनो सर ने बताया कि चार दिन बाद एक बड़ी बुल फाइट होने वाली है। इसमें जीतने वाले सांड के लिए बहुत बड़ा ईनाम रखा गया है।

जिराफ़ की समझ में कुछ नहीं आया। वह सिर खुजाते हुए बोला - "लेकिन बुल फाइट में मैं कैसे लड़ सकता हूं। और वैसे भी सांड तो मुझे हरा ही देगा।"

राइनो सर ने कहा - "भाई, तुम इतनी बड़ी मॉल के मालिक बन कर भी बुद्धू के बुद्धू ही रहे। अरे यार तुमसे लड़ने के लिए कौन बोल रहा है? मैं तो ये कह रहा हूं कि बुल फाइट के लिए एक मजबूत मैदान चाहिए। और यदि तुम्हारी छत तैयार हो जाती है तो उस पर सांडों का युद्ध कराया जा सकता है। तुम्हें इसके लिए बहुत अच्छा किराया मिलेगा। और जो कहीं तुम फाइट देखने के लिए छत पर ही लोगों के बैठने की व्यवस्था भी करा दो तब तो वो तुम्हें बहुत ही अच्छा किराया दे देंगे। यूं समझो कि लाखों में।"

" अच्छा। फिर तो मज़ा आ जाए। पर वो फाइट करवा कौन रहा है?" जिराफ ने पूछा।

"अभी सीक्रेट है। मैं तुम्हें बता तो देता हूं पर तुम किसी को बताना मत। दरअसल एक बड़े शहर की सर्कस कंपनी ये काम करने वाली है। वो लोग जंगल में सर्कस शो, बुल फाइट, मुर्गों की लड़ाई, बकरों का मल्लयुद्ध आदि भी रखेंगे। वो इन सब इवेंट्स के लिए स्थाई जगह की तलाश में हैं। कहो तो बात करूं? तुम्हारे पौ बारह हो जायेंगे!"

"नेकी और पूछ पूछ! करो भाई करो।" जिराफ़ गदगद हो गया।



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