Leena Jha

Others


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दु फिती चट्टी

दु फिती चट्टी

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लाल काकी असगरे लाइन घेने गाम दिस आइब रहल छलीह। चाइर बाइज गेल छल किंतु जरलहवा रउद कनिको मलिन होव कऽ नाम नइ लऽ रहल छल। लाल काकी मांथ आंचर सं झंपने एकटा हाथ में झोड़ा आ दोसर में चट्टी नेने छली।‌ पोखरि पर खरिहान छलैन सोचइ रहल छलीह जे कहुना कऽ ओतय पहुंच जाई तऽ कने दम धय कऽ आगां बढ़ली अंगना लेल। पोखरि पर दियादिनी के घर सऽ बहरैल पुतोहू के घर छल। ओही बेर में ओ अपन अंगना सौं बहरैल छली माल के पाइन देबय लेल। लाल काकी के देखिते ओ पुछय लगली.... 


लाल काकी !! एते रउद में कत सऽ आइब रहल छथिन?


लाल काकी कनियां के देख कहय लगली

...उदावाली कनियां...कि कहु यै... समस्तीपुर गेल रही...बड़का डागदर सऽ देखब लेल।


उदाबाली डागदर के नाम सुनिते पुछय लगली...


की भेलन्हि काकी ....मन कहिया सऽ खराप भऽ गेलनि?


लाल काकी.... की कहू हम... पंद्रह दिन सँ कनियो रुचि नइ लागइ रहल अइछ।मन कैहने दइन करइत रहइत अइछ। दुबर भेल जा रहल छी से अलगे। बउआ फोन केने रहे। कह लागल..

मैऽ गे शोणित के कमी भऽ गेल छउ। गामक डागदर सऽ नइ ठीक भऽ रहल छउ। समस्तीपुर में बड़का डागदर सऽ देखा आबै। आ डागदर सऽ कहिंये बिटामिन के गोटी सब लिख देतउ। कनियां यै बुझलउं ....कहलक बउआ ...कहियै ओ कैपसुल... कि नाम छइ... जरलहवा के...हां मन पङल...बिकासुल के कपसुल लिखवा लिहै।


उदाबाली कनियां ‌‌.... अच्छा!!!तखन कि कहलकैन डागदर। सब ठीक छैन ना?


लाल काकी....हां यै सब ठीक कहलक... कमजोरिये कहलक...दवाई संगे एकटा रुइच खोलबा के लेल सिरप सैहो लिख देलक।


उदाबाली कनियां.... भगवती सब नीक रखथिन काकी। अपन धियान राखल करइथ।कोनो काज सब होइन तऽ बच्चा सब हाथे बजबा लेल करइथ हमरा। अनेरुआ बुझय लगलखिन ई तऽ हमरा। अंगने सँ तऽ बहरैलियनि यै ई सब तऽ मोन सँ सेहो बहरा देलखिन ।


लाल काकी...कनियां !!! केहन बात करइ छी। हम अपन कनिया आ अहाँ में कहियो अतंर बुझलउं? 


काकी आगां किछु कहितथि ओई सँ पहिने कनियां पुछऽ लगली। 


काकी यै हिनकर पैर में कि भऽ गेलेन? चट्टी हाथ में नेने आबइ छथिन?


लाल काकी. .. कि कहूं यै कनियां। घर सऽ निकलइते बेर हमर पुरना चट्टी टुइट गेल।कनिया कहय लगली...मैऽ ऐ नवका चट्टी जे बेटा आइन देने रहथिन से कहिया पहरथिन? आइये पहिर ने लउथ ओ चट्टी। हमहूँ कहलउं...ठीके तऽ कहि रहल अइछ कनियां। एते सौख सँ बउआ अनने छल। हमहूँ पहिर चइल गेलउं। की कहू कनियां !!! चइल तऽ गेलऊं मुदा आदत अइछ दु फीतीया रबरबला चट्टी के से इ चमड़ा बला चट्टी संउसे तरवा में घाव कऽ देलक । टिशन पर उतइर हम गाम लेल चइल ऐलउं आ कक्का के कहलिअनि....यौ सुरज के बाबूजी!!!एकटा दु फितीया चट्टी खरीदने आबु हमरा लेल। आ नवका जमाना के चट्टी नवकीये कनियां मनियां के लेल नीक।

एते कहि लाल काकी उदाबाली के बनाओल चाह पाइन पीबि फेर सँ एक हाथ में झोड़ा आ दोसर में नवका जमाना के चट्टी लऽ अपन अगंना दिस विदा भऽ गेली।


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