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अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

Children Stories Inspirational

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अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

Children Stories Inspirational

डर – कहानी

डर – कहानी

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जीवन अग्रवाल जी का एक ही पुत्र था प्रणय। वे प्रणय को लेकर हमेशा चिंचित रहते थे। प्रणय बचपन से ही खुद पर विश्वास करने में खुद को अक्षम पाता था। अग्रवाल जी ने अपनी ओर से काफी कोशिश की किन्तु वे प्रणय की इस कमी को दूर नहीं कर सके।

अब प्रणय दसवीं कक्षा में पहुँच गया था। उसकी खुद पर विश्वास न करने की वजह से वह आज तक किसी भी कक्षा में अव्वल नहीं आया। इसके अलावा भी वह घर के कामों में भी खुद को संयमित नहीं रख पाता था और कुछ न कुछ गलती कर बैठता था। प्रणय की इस समस्या को लेकर घर के सभी लोग चिंचित रहते थे। प्रणय से जब भी बात की जाती तो वह कहता कि उसे जब भी कोई काम दिया जाता तो वह डर जाता और इसी कारण उससे कोई न कोई गलती हो जाती।

प्रणय के दसवीं के परीक्षा परिणाम को लेकर भी उसके माता – पिता बहुत ही ज्यादा चिंचित थे। स्कूल में एक नए टीचर का आगमन हुआ। नाम था संजय सर। सभी बच्चे संजय सर से बहुत ज्यादा प्रभावित थे। उनके पढ़ाने का तरीका और बच्चों के साथ घुल – मिलकर रहने के उनके व्यवहार से बच्चों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ। किन्तु प्रणय अभी भी वहीँ पर अपने आपको पा रहा था जहां वह कई वर्षों से था। प्रणय के व्यवहार को संजय सर ने नोट किया और उन्हें लगा कि शायद मैं प्रणय की मदद कर सकता हूँ।

अगले दिन संजय सर ने प्रणय के पिताजी को फोन लगा दिया। उनसे बात हुई और उन्होंने उनसे घर पर मिलने का समय ले लिया। शाम को वे प्रणय के घर जा पहुंचे। घर का दरवाजा प्रणय ने ही खोला। उसने सर को देखा तो घबरा गया और जल्दी से घर के भीतर चला गया। प्रणय के पिताजी ने संजय सर का स्वागत किया और बचपन से लेकर आज तक की सारी बातें प्रणय के बारे में संजय सर को बता दीं। संजय सर ने प्रणय को बुलाया और कहा कि क्या वह अपना आत्मविश्वास वापस प्राप्त करना चाहता है। प्रणय ने हां में सर हिलाया। संजय सर प्रणय की इस बात से खुश हुए।

अब थी बारी संजय सर की। कि वे किस तरह से प्रणय का आत्विश्वास जगाएं। अगले दिन संजय से ने प्रणय को कुछ ट्रिक पर आधारित खेल खेलने को दिए। इन खेलों में प्रणय को बहुत ज्यादा मजा आया और साथ ही इन खेलों पर उसकी पकड़ मजबूत हो गयी। इन खेलों में प्रणय ने पूरे – पूरे अंक हासिल किये। इस गतिविधि में करीब एक सप्ताह का समय लगा। इसके बाद संजय सर ने उसे ऐसे प्रोजेक्ट दिए जिसमे प्रणय को खुद अपनी क्षमता का प्रयोग कर प्रोजेक्ट को पूरा करना था। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए संजय सर ने प्रणय को पहले ही कह दिया था कि किसी प्रकार की मदद की जरूरत हो तो मुझे बता देना। प्रणय के ने हां में सिर हिला दिया। खेल गतिविधियों में पूरे अंक हासिल करने के बाद प्रणय का आत्मविश्वास बढ़ गया था। इसलिए उसे लगा कि इस बार भी मुझे सर को बताना होगा कि मैं इस प्रोजेक्ट को भी अपने दम पर पूरा कर सकता हूँ। और यही हुआ भी। इस प्रोजेक्ट में भी प्रणय ने अपनी क्षमता से भी बेहतर प्रदर्शन किया। संजय सर को लगने लगा कि प्रणय अब सही दिशा में अग्रसर हो रहा है। प्रणय के माता – पिता को भी प्रणय में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगे।

अंत में संजय सर ने प्रणय को वे प्रोजेक्ट दिए जिनमे उसकी रूचि कम थी। फिर भी प्रणय के आत्मविश्वास में कमी नहीं दिखाई दी। उसने पूरे उत्साह के साथ प्रोजेक्ट को पूरा किया और जहाँ उसे सर की जरूरत महसूस हुई उसने सर से राय ली और प्रोजेक्ट को पूरा कर दिखाया। अब बारी थी परीक्षा की तैयारी की। उसके लिए भी संजय सर ने अपनी योजना बनायी और उस पर अमल किया। धीरे – धीरे प्रणय ने खुद को सभी क्षेत्रों में परिपक्व किया और अपने स्कूल में कक्षा दसवीं में टॉप किया।

प्रणय के लगातार किये गए प्रयासों ने उसके भीतर आत्मविश्वास का संचार किया। प्रणय ने प्रिय शिक्षक के चरणों में गिरकर उनका अभिवादन और धन्यवाद किया। प्रणय के घर में सभी लोग प्रणय की इस उपलब्धि पर खुश भी थे और आश्चर्यचकित भी। उन्होंने संजय सर को उनके सफल प्रयासों के लिए कोटि – कोटि धन्यवाद दिया। और भविष्य में भी प्रणय को प्रेरित करते रहने का आग्रह किया।


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