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Prabodh Govil

Children Stories

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Prabodh Govil

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डोर टू डोर कैंपेन- 6

डोर टू डोर कैंपेन- 6

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अगले दिन सुबह तीन चार डॉगी मिल कर पहुंच गए हाथी बाबू के ठीहे। कई विशाल पेड़ों के एक बड़े से झुरमुट के गिर्द हाथी अपने सब पारिवारिक साथियों के साथ रहता था।

हाथी बाबू ने सड़क से गुजरते हुए कुत्तों को भौंकते हुए तो कई बार सुना था पर इतने मीठे सुर में घर के दरवाज़े पर आकर बोलते हुए पहली बार सुना।

उन्हें ये सुन कर सुखद आश्चर्य हुआ कि अब जानवरों की दुनिया में भी लोकतंत्र आने को है और उसे शेर की मंजूरी भी मिल चुकी है।

हाथी बाबू ने कुत्तों की बात को पूरी गंभीरता से सुना क्योंकि वो जानते थे कि इनकी पहुंच आदमियों की दुनिया में ज़बरदस्त ढंग से है। वो लोग केवल इन्हें अपनी गाड़ियों में ही लिए नहीं घूमते, बल्कि कभी कभी किसी पॉश इलाक़े में तो इनकी पॉटी तक उठाते पाए जाते हैं।

ऐसे में जब एक कुत्ते ने उनसे कहा कि आप अपनी प्रॉब्लम्स बताइए, हम उन्हें दूर करेंगे तो हाथी बाबू ने अपनी पत्नी और बच्चों को भी बुला लिया।

हाथी ने कहा- भाई, अगर आप अपने इंसान दोस्तों को समझा सकें तो उन्हें ये बताइए कि कम से कम हमारे जीते जी हमारे दांत न उखाड़ें। हम जानते हैं कि ये बहुत कीमती हैं और इनसे उन्हें बहुत से रुपए मिलते होंगे पर कम से कम इसके लिए वो लोग हमारे मरने का इंतजार तो करें। हमारे जीते जी हम पर तरह - तरह से आक्रमण करके दांतों को ले जाकर बेचा जाता है तो बहुत दुःख होता है। और केवल हमारे शरीर की किसी मूल्यवान वस्तु को पाने के लिए असमय हमारी जान ही ले लेना तो किसी भी तरह उचित नहीं है।

हम जानते हैं कि आदमियों में बहुत सी अच्छाइयां भी हैं। वो कई बार हमें भी पाल लेते हैं, हमें सजा संवार कर हमारी सवारी भी निकालते हैं। तब हमें अच्छा अच्छा खाना खाने को दिया जाता है।

सर्कस में भी हमें काम दिया जाता है, एक हथिनी ने कहा।

वहां से लौट कर कुत्तों को पूरा यकीन हो गया कि अगर वो इन हाथियों की हत्या रुकवा पाएं तो ये ज़रूर राजा बनाने के लिए हमारा समर्थन करेंगे।

चलो, शुरुआत तो अच्छी हुई, एक थके हुए कुत्ते ने कहा।


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