बुरी आदत
बुरी आदत
रमन और रानी स्टेशन में अंदर जा रहे थे। नीता मन ही मन क्रोधित होते हुए भी बाहर से बिल्कुल नॉर्मल होने का दिखावा कर रही थी। रमन बेहद शर्मिंदा था और हालांकि कोई किसी को कुछ नहीं कह रहा था लेकिन रजत भी बहुत दुखी हो रहा था।
रजत और रमन दोनों भाई थे। रजत और नीता दोनों दिल्ली में रहते थे और बैंक में ही नौकरी करते थे। रमन पुणे में कंप्यूटर प्रोग्रामर था और उसने अपनी सहकर्मी रानी से विवाह कर लिया था। दोनों के पिता भोपाल में ही एक सरकारी ऑफिसर थे। रमन की शादी के समय नीता ,रजत अपनी पुत्री रिंकी के साथ भोपाल भी रहे थे। भोपाल में 15 दिनों में ही नई बहू रानी ने सबका मन मोह लिया था। भोपाल से दिल्ली आने के बाद नीता ने पाया कि उसका बहुत सा सामान भोपाल में ही छूट गया था।जब उसने सासू मां को बताया उसकी एक पायल और आपके द्वारा दिए गए बहुत से उपहार वहां ही रह गए हैं तो उन्हें संभाल कर रख लेना जब भी कभी भोपाल आना होगा तो वह ले लेगी, इसके विपरीत सासु मां ने नीता को कहा कि उनके ही घर का बहुत सारा सामान मिल नहीं रहा वह तो सोच रही थी कि कहीं गलती से तुम्हारे सामान में ही ना बंध गया हो। बात आई गई हो गई थी।
विवाह के 6 महीने बाद रमन और रानी दोनों 1 सप्ताह के लिए दिल्ली आए थे। रजत और नीता ने अपने बैंक से दो ,दो दिन की छुट्टियां भी ले लीं थी, रिंकी जो कि 10 से 5 तक क्रैच में ही रहती थी इन दोनों के आने के कारण वह भी अपने क्रैच में नहीं जा रही थी। क्योंकि रजत और नीता ने भी दो 2 दिन की छुट्टियां ले रखी थी फिर अंकल और चाची भी उसे बहुत प्यार कर रहे थे।
रानी तो नीता को कोई काम ही नहीं करने दे रही थी वह घर का सारा काम खुद ही कर रही थी इन 4 दिनों में ही उसने घर का लगभग हर काम अपने हाथ में ही ले लिया था। शनिवार इतवार की तो छुट्टी थी ही। इन 5 दिनों में 2 दिन जब नीता ऑफिस गई तो रानी ने बहुत अच्छा खाना बनाकर दोनों भाइयों को खिलाया। नीता को रानी का रहना बहुत अच्छा लग रहा था। नीता ने रानी के लिए बहुत सुंदर कानों के टॉप्स उसको पहली बार उनके घर दिल्ली आने पर उपहार स्वरूप देने के लिए बनवा कर रखे थे। क्योंकि उन्होंने रविवार को वापिस जाना था तो उसने शनिवार को अपनी अलमारी में से वह टॉप्स निकालने के लिए अलमारी खोली तो पाया वहां पर ना तो टॉप्स से थे और ना ही उसकी चेन पेंडल।
वह बेहद घबरा गई। रजत और नीता बेहद परेशान से अपने कमरे में हर जगह वही ढूंढते घूम रहे थे कि तभी नीता ने रिंकी के हाथ में अपनी चांदी की बालों की क्लिप देखी जो कि भोपाल में ही छूट गई थी। नीता ने हैरान होकर रिंकी से पूछा कि मेरी यह क्लिप तुम्हें कहां मिली तो उसने बताया कि यह फिश जैसी क्लिप मैंने चाची के बैग से निकाली है। चाची ने उसमें बहुत सारा सामान रखा हुआ है।
अचानक से कुछ फैसला करते हुए रजत और नीता रमन के कमरे में गए और नीता ने सीधे और स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह मेरी क्लिप रानी के ब्लैक बैग में से रिंकी को मिली है और भी मेरा बहुत सा सामान जो कि मिल नहीं रहा मुझे तुम्हारे बैग में देखने हैं। हालांकि रमन को यह सुनकर गुस्सा तो बहुत आया लेकिन वह अपने बड़े भाई रजत की बहुत इज्जत करता था और उसने गुस्से में ही कहा, आज के बाद हम आपके घर कभी नहीं आएंगे और बैग देखने के बाद मेरा भी जो सामान हो वह भी आप ही रख लेना। हालांकि रानी तो बैग खोलने का विरोध कर रही थी लेकिन रमन ने गुस्से में आकर अपने पैक करे हुए सारे बैग उन दोनों के सामने खोल कर सारा सामान बिखेर दिया।
उन्हीं बैग में एक रुमाल में बंद चेन और रीना को दिए जाने वाले टॉप्स की डिब्बी भी मिल गई। इसके अतिरिक्त रिंकी तक की छोटी पायल भी उस बैग में थी। छोटा मोटा घर का और भी बहुत सा सामान रानी के उस बैग में था।
मामले की गंभीरता को समझते हुए सब चुप थे। रजत और नीता बिना कुछ कहे केवल अपना सामान लेकर अपने कमरे में आ चुके थे।
दूसरे दिन जब रमन और रानी वापस पुणे जाने के लिए रेलवे स्टेशन तक घर से जा रहे थे तो रजत और नीता भी अपनी गाड़ी में स्टेशन तक उन्हें छोड़ने के लिए चले।
मन में भले ही किसी के कुछ भी चल रहा हो लेकिन कोई भी कुछ नहीं कह रहा था और जाते हुए नीता ने रानी को खरीदे हुए नए टॉप्स देने चाहे तो रानी ने साफ मना कर दिया। कार से उतरकर जब रमन और रीना स्टेशन पर जाने लगे तो रजत ने हमेशा के जैसे रमन को गले लगाते हुए कहा, कुछ भी हो हम एक फैमिली है इस बात का ध्यान रखना। नीता ने भी जबरदस्ती से वह टॉप्स रानी को पकड़ाते हुए कहा जो हुआ हम उसका जिक्र कहीं नहीं करेंगे और तुम भी भूल जाओ और अब ऐसा कभी भी ना करने की कसम खाओ। चोरी करना बुरी आदत है इसे हमेशा के लिए छोड़ दो। तुम मेरी छोटी बहन के जैसी हो।
घर वापस जाते हुए रजत बेहद परेशान होकर नीता से कह रहा था अगर हमारे बच्चे भी कोई गलती करें तो हम उन्हें हमेशा के लिए छोड़ तो नहीं देंगे ना। तुम भी मन में कुछ मत रखो। अब तो रमन भी जान गया है शायद रानी की आदत अब सुधर ही जाए।
