STORYMIRROR

Sangeeta Pathak

Others

4  

Sangeeta Pathak

Others

बारिश की बूँद

बारिश की बूँद

1 min
298

कजरारे मेघों की ओट से

जन्मी बूँद आँखों में आँसू

भरकर बोली...

ये हमारी आखिरी मुलाकात है।

मैं धरा को सिंचित करने जा रही हूँ।

आज अपना अस्तित्व मिटाने जा रही हूँ।

ये हमारी आखिरी मुलाकात है।

मैं बलिदान पथ पर जा रही हूँ।

मेघों ने कहा-तुम्हारा यह बलिदान

व्यर्थ नहीं जायेगा।

तुम्हारी शीतल बूँदें धरित्री को

सिंचित करेंगी।

सूखे ताल तलैया नदी नालों

को प्रेम की बौछारें लबालब भर देंगी।

सावन में धरा अप्रतिम हरितिमा से

लहलहाने लगेगी।

दुल्हन सा श्रृंगार कर धरा फिर से

निज रूप पर इठलाने लगेगी।

वह हमेशा तुम्हारे प्रेम के अभिसिंचन

का गुणगान करेगी।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन