अफ़वाह
अफ़वाह
अफ़वाह सुनी तो सबने होगी पर क्या उन अफ़वाहों के पीछे का सच भी कोई जानता है?? कभी खुद से सवाल किया है के इन अफ़वाहों या सुनी -सुनाई बातों के पीछे का सच क्या है??
आते -जाते गलियों में, समूह - समुदाय में लोग बस एक ही काम में मगरूर रहते है एक दूसरे की बुराई या निंदा करने में, उनको उन्नति करने वालो की उन्नति बर्दाश्त नहीं हो पाती तो उनका एक मात्र सहारा होता है। अपने दिल की भड़ास निकालने का उस इंसान की निंदा और बुराई शुरू कर देते हैं, फालतू और गलत अफ़वाह फैलाने लागते है, ताकि समाज में जो उनकी प्रतिष्ठा, और जो मान - सम्मान है वो कम हो जाये, उनकी तरक्की में रुकावट आये, समाज में उनको शक भरी निगाहों से देखा जाने लगता है।
और कुछ कान के कच्चे लोग भी उनकी बातों में आकर उन गलत बातों को बढ़ावा देते है, ये भी नहीं सोचते या पता लगाते के इन बातों में कितनी सच्चाई है??? ये बातें सच है भी या नहीं बस बिना किसी कसूर के उन्हें ऐसी बात की सजा सुना दी जाती है जो उन्होंने कभी की ही नहीं।
इस कहानी का मुख्य उद्देश्य यही है के लोगो के सुनी सुनाई बातों में ना आये, उस बात को जाने, उस इंसान से बातचीत करे, पूछे के जो बातें लोग बना रहे है सच है या नहीं??? अफ़वाहों की जांच करने के बाद ही किसी नतीजे पर पहुँचे, आजकल कुछ असमाजिक तत्व हिंसा फैलाने के उद्देश्य से भी गलत अफ़वाह फैलते है धर्म और जाती के नाम पर उन अफ़वाहों पर भरोसा ना कर के जागरूक नागरिक बने। कान के कच्चे इंसान नहीं।!
