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तेरे होने...

तेरे होने का अहसास ही है बस जीने के लिये दुनियाँ तो है घाव पर नमक डालने के लिए यूँ तो चाहत है तेरे संग जाम छलकाने की बस अब तो अश्क ही बाकी हैं पीने के लिए।।

By विनोद महर्षि'अप्रिय'
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