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मिलना...

मिलना बिछड़ना दस्तूर है ना जाने किसका कुसूर है यादें संजो कर चल दिए कुछ खट्टे मीठे पल लिए उनके जाने से जिंदगी रूकी नही पर वो जगह,कभी भरी भी नही अंशु शर्मा

By Anshu sharma
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