ना समझ हूँ ना सहज हूँ कुछ बात क्षितिज तक दिख जाती है ना समझ हूँ ना सहज हूँ कुछ बात क्षितिज तक दिख जाती है
ऊँचाइयों का कोई पैमाना नहीं ऊँचाइयों का कोई पैमाना नहीं
साथ चाहिए पर.. कदम दो कदम का नहीं. साथ चाहिए पर.. कदम दो कदम का नहीं.