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Devkaran Gandas

Others

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Devkaran Gandas

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यादों का सफर

यादों का सफर

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जनवरी की सर्दी

और ट्रेन का सफर 

खुलती हुई खिड़की

और ठंड का कहर,  

इसके बीच में 

चलता जा रहा हूं

अपने कर्मपथ पर

तेरी बातों के संग।


हां , जानता हूं मैं

तू सो रही है रजाई में

बंद किए हवा के दरवाजे , 

पर तुझे भी 

यह मालूम नहीं

कि तू चल रही है

मेरे संग संग में

इस सुहाने सफर में।


वो सफ़र , जो शुरू हुआ है

अभी अभी लेकिन 

चलेगा सदियों तलक

बिना रुके , बिना थके 

तुझे साथ लेकर

वहां तक ,

जहां मिलते हैं

धरती और आसमान

और हो जाते हैं 

एकाकार क्षितिज पर।


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