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Shiwani Babu

Others

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Shiwani Babu

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यादें

यादें

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यादों के महफिल में उजाले बहुत हैं,

लेकिन जरा अंधेरों ने भी पहरा जरूर डाला है।


कुछ यादों को भुलाना चाहा है,

लेकिन कुछ का आशियाना भी सजाया है।


यादें याद बन चुकी हैं,

लेकिन इन्हीं के सहारे मन की बेचैनी को समझाया है।


यादों का क्या है अक्सर आती जाती रहती हैं,

लेकिन हमने भी दिल पे कोई पहरा नहीं लगाया है।


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