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Rakesh Srivastava

Others

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Rakesh Srivastava

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यादें बचपन की

यादें बचपन की

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वो दिन भी क्या दिन थे

जब सच में मनती थी दीवाली

भाई-बहन संग संग मिल कर

मिट्टी का एक घरौंदा बनाते थे।


मिलजुल कर उसको रंगते थे

और सब मिलकर खूब सजाते थे

शाम ढले घर में दीवाली मनती थी

फिर हमारे घरौंदे में भी मनाते थे।


नाना के घर या बाबा के घर

सब भाई बहन इकठ्ठे हो कर

हिल मिल खूब पटाखे जलाते थे

खील बताशे लाई मीठे खिलौने

कई तरह के पकवान

हम संग बैठ कर खाते थे।


न जान वो दिन कहां चले गए

सब रिश्ते कितनी दूर हो गए

क्या फिर कभी ऐसा हो पाएगा

नाना के घर या बाबा के घर।

 

हम फिर संग-संग हर त्योहार मनाएंगे

क्या वापस दिन वो फिर आएंगे।


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