वक्त की पुकार
वक्त की पुकार
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वक़्त की अपनी पुकार सुनो
बात पर, किसी की ध्यान ना दो
दिल दिमाग को खोल के अपने
लक्ष्य प्राप्ति पर आगे बढ़ो।।
हटा जीवन से अंधेरा अज्ञान का
ज्ञान के पथ पर आगे बढ़ो
उज्ज्वल कीर्ति स्थापित करने
कर्मठता की उड़ान भरो ।।
वक़्त बदलता हर पल हर क्षण
इसकी तुम दरकरार सुनों
हँसायेगा या रुलायेगा
खुल कर अपनी जिन्दगी जीओ ।।
होनी तो सदा होके रहेगी
पर अनहोनी ना घटने दो
मेहनत की तुम तह तक जाकर
मजबूत जीवन की नीव धरो ।।
जो कहता है उसे कहने दो
मार्ग पर अपने बढ़ते चलो
उर में सादा जीवन उच्च विचार रख
लक्ष्य अपना फतेह करो ।।
