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सुधीर गुप्ता "चक्र"

Others

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सुधीर गुप्ता "चक्र"

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वह औरत है

वह औरत है

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उम्र को अंगूठा दिखाकर

दिन भर की भागम-भाग के बाद

घर लौटती है जब मजूरन

भूल जाती है

दिन भर की अपनी व्यस्तता

फिर

थकान को खूंटी पर टांगकर ...

एक-एक करके

चूल्हे में सरकाती है लकड़ियाँ और

लकड़ियों के साथ खुद जल कर

सबकी खुशी का रखती है ध्यान

क्योंकि

वह औरत है।  


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