स्वयं से मिलन
स्वयं से मिलन
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आओ आज अपने आप से मिलते हैं।
बहुत दिन हुए स्वयम् से मिले हुए,
चलो उपवन में देखें फूल खिले हुए।
कभी नाम की चाहत, कभी काम की चिंता,
कभी औरों के दिए दर्द की घुटन।
किसी ने कुछ कह दिया क्यों उसकी है चुभन।
चलो छोड़कर ज़माने की उलझन,
आओ कहीं चलें करने स्वयं से मिलन।
✍️गीता कुमारी
