STORYMIRROR

Nishigandha Kakade

Others

3  

Nishigandha Kakade

Others

समंदर की तपिश!

समंदर की तपिश!

1 min
187

बुझी हुई सिमटी सी राख में  

कहीं तो अभी भी तपिश बाकी है,

अगर कोई छेड़ भी दे उसे ,

उस सुलगती तपिश में भी फिर से,

सब राख करने की हिम्मत है!


मन में पूरा समंदर बसा के,

मनुष्य भी बाहर सूखा दिखता है,

मन के तार छेड़े कोई तो,

पूरे जीवन में सैलाब लाकर,

सब एक पल में तबाह कर देता है!


Rate this content
Log in