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Sanju Pathak

Others

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Sanju Pathak

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शीर्षक : " शुभमस्तु दीपमालिके!

शीर्षक : " शुभमस्तु दीपमालिके!

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दीप की पंक्तियां झिलमिलाने लगीं।

एक संदेश सबको सुनाने लगीं ।।

हो तमस तल के नीचे भले ही मगर,

रश्मियां राह को जगमगाने लगीं।।

घर के जाले छुड़ाने लगे हैं सभी,

मन के जाले छुड़ाना सिखाने लगीं।।

खुद के रोशन किये घर बड़ी बात क्या?

कर दो रोशन सभी घर बताने लगीं।।

मत करो मन मलिन ए मेरे दोस्तों!

मन की कटुता दिलों से मिटाने लगीं।।

शुभ हो दीपावली है मेरी कामना,

सारे दीपों की लौ ये गुनगुनाने लगी।।



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