शाम
शाम
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धूल मिट्टी में खेलते अपने बच्चो को जिस तरह,
माँ ..शाम होते ही अपने,
आंचल में छुपाकर ले जाती हैं,
और घर जाकर उनके हाथ मुंह धुला,
रजाई में छुपा देती हैं,
वैसे ही ..
रोज ये शाम ,
सूरज को अपने आंचल में छुपा ले जाती है ..
और लोग कहतें हैं ,सूरज डूब रहा है...
सूरज भी ,कभी डूबा करते हैं भला ...।।
