सावन की धूप
सावन की धूप
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आँगन में पसारे गीले कपड़े
हवा से डोलते, इधर-उधर
काले सफेद बादलों से
आँख मिचौली, खेल खेलती
छन रही सावन की धूप।
मुँडेर पर बैठे कबूतर दो
रसोई में चींटियों की कतार
जुटा रहे अपना खाना
क्या पता, कब बदरा बरसे
खो जाए सावन की धूप।
बरसाती हवा संग झूलते
मधुमालती के लाल-सफेद फूल
गौरैया के बच्चे, भूखे, गीले
इंतजार- माँ का, भोजन का
उनका संबल - सावन की धूप।
धोकर विपुल वट वृक्ष पर्ण
छुपती गायों को गीला करती
अंबर के स्नेह रसबूँदों में
खुद को खोकर, इंद्रधनुष
बन जाती सावन की धूप।
