STORYMIRROR

Rajesh Kamal

Others

3  

Rajesh Kamal

Others

आशा

आशा

1 min
358



रौशनी की तलाश में

भटकता मन अंतस

गिरते-उठते ज्वार सा

आवेग करते अतिक्रमण,

अपनी ही परछाई से

डर सा लगने लगे,

डरो मत, उठो!

आशा के दीप

छोटे ही सही

लौ थरथराती ही सही

अकेले लड़ेंगे अंधेरों से,

डरेगा, अंधेरा भी

दीप की नन्ही लौ से,

भाग्य को कोसने की बजाये

कुछ कर दिखाएँ

एक छोटा सा दीप जलायें।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन