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Gaurav kumar

Others

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Gaurav kumar

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पापा पर कविता

पापा पर कविता

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कभी अभिमान तो कभी

स्वाभिमान है पिता,

कभी धरती तो कभी

आसमान है पिता,

जन्म दिया है अगर माँ ने,


जानेगा जिससे जग वो

पहचान है पिता,

कभी कंधे पे बिठा के

मेला दिखाता है पिता,

कभी बन के घोड़ा घुमाता

है पिता,


माँ अगर पैरों पर चलना

सिखाती है,

पैरों पर खड़ा होना

सिखाता है पिता।


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