STORYMIRROR

Gaurav kumar

Others

2  

Gaurav kumar

Others

पापा पर कविता

पापा पर कविता

1 min
322

कभी अभिमान तो कभी

स्वाभिमान है पिता,

कभी धरती तो कभी

आसमान है पिता,

जन्म दिया है अगर माँ ने,


जानेगा जिससे जग वो

पहचान है पिता,

कभी कंधे पे बिठा के

मेला दिखाता है पिता,

कभी बन के घोड़ा घुमाता

है पिता,


माँ अगर पैरों पर चलना

सिखाती है,

पैरों पर खड़ा होना

सिखाता है पिता।


Rate this content
Log in