पाप और पुण्य
पाप और पुण्य
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पाप क्या पुण्य क्या सब उसे अपने हाल पर छोड़ दो।
जिंदगी का यह उल्लेख ख़ुद से ख़ुद करना छोड़ दो।
होगा वही किस्मत में लिखा हार्दिक भाग्य तेरा होगा।
अपनी जिंदगी जीवन की अपने हाल पर छोड़ दो।
