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Krishna Khatri

Others

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Krishna Khatri

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पांचवीं पास !

पांचवीं पास !

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मैंने जो ठान लिया

वो कर लिया, 

था बड़ा ही मुश्किल

नहीं था मगर नामुमकिन

मां ,,,,,,,

हर पल तू सामने रहती

गूंजते रहते कानों में 

तेरे ही शब्द -

"जिन्दगी में कभी पीछे न हटना" !

उन्हीं शब्दों ने 

बांधे रखा मुझको, 

तेरी अनपढ़ बेटी 

बन गई लेक्चरर !

तब तू बड़े गर्व से कहती

"मेरी बेटी तो पढ़ाती है काॅलेज में" 

लोग बड़े अचंभे से पूछते

पांचवीं पास ?

काॅलेज में ,,,,, कैसे ? 

वो ऐसे कि पूरा किया उसने 

संकल्प अपना

मेरी पांचवीं पास बेटी 

पढ़-लिखकर बन गई डाॅक्टर

सिर ऊंचा कर दिया मेरा !

          



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