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Dr.Pratik Prabhakar

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नवगीत नववर्ष का

नवगीत नववर्ष का

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जो बीता वो भूल जाओ

नवगीत अब गुनगुनाओ।।


आज क्या है पास में

किसके खासमखास में

उन बातों से नजर मोड़ो

खुद को न ही भरमाओ।।


प्रण करें खुद ही अब

मेहनत को बनाये रब

प्यास पाने की हो बस

भूख जीत का जगाओ।।


शुभकामनाएं अशेष मेरी

जीत में नहीं हो अब देरी

ईश्वर करें आप सबल हो

उन्नत-अद्भुत बन जाओ।।


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