निर्मल झरने
निर्मल झरने
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दो अनंत निर्मल झरने
बहते हैं ऊंचाई से
ना रूख पता, ना मोड़ पता
बहते जाते हैं गहराई से।
मिले पथिक रास्ते में
उसे छाया संग जलपान
कराते जाते हैं
अनंत निर्मल झरने
मिलकर लहराते जाते हैं।
मधुरता का काम करके
नदियों में मिलते जाते हैं
दो अनंत निर्मल झरने
पथ पथ में मिठास भरते जाते हैं।
