मुन्नी
मुन्नी
1 min
355
वो आई थी धरा पर
खिलने के लिए।
जिसने बोया था उसको,
उसे रूबरू मिलने के लिए।
अनजान थी दुनिया से,
अनजान थी लोगों से,
झगड़ रही थी वो,
अपने ही पहचान के लिए।
वो समय आया जब,
रखा गया उसका नाम।
मुन्नी मुबारक हो तुम्हें,
ये हसीन और सुहानी शाम।
