मुहब्बत से घर पलते रहेंगे
मुहब्बत से घर पलते रहेंगे
1 min
315
सफर के लिए हम निकलते रहेंगे
दुआ माँ की लेकर यूँ चलते रहेंगे
अन्जुमन में है चाहने वाले मेरे
यहाँ सबसे मोहब्बत करते रहेंगे
बदल कर कभी हर्फ़ तुमको पढेंगे
नए ज़ाविये से हम लिखते रहेंगे
तिज़ारत करे प्यार का सबसे हम भी
ठेकेदार कब तक हम बनते रहेंगे
बना कर ये क्या रख दिया तुमने सबको
गलत बातों पर ही झगड़ते रहेंगे
जलेगी मुहब्बत शमा की हमेशा
चिराग ए मुहब्बत यूँ जलते रहेंगे
रफ़ू कर ले तू भी ग़मो को यूं 'आकिब'
मुहब्बत से घर अपने पलते रहेंगे
