मुहब्बत से घर पलते रहेंगे
मुहब्बत से घर पलते रहेंगे
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सफर के लिए हम निकलते रहेंगे
दुआ माँ की लेकर यूँ चलते रहेंगे
अन्जुमन में है चाहने वाले मेरे
यहाँ सबसे मोहब्बत करते रहेंगे
बदल कर कभी हर्फ़ तुमको पढेंगे
नए ज़ाविये से हम लिखते रहेंगे
तिज़ारत करे प्यार का सबसे हम भी
ठेकेदार कब तक हम बनते रहेंगे
बना कर ये क्या रख दिया तुमने सबको
गलत बातों पर ही झगड़ते रहेंगे
जलेगी मुहब्बत शमा की हमेशा
चिराग ए मुहब्बत यूँ जलते रहेंगे
रफ़ू कर ले तू भी ग़मो को यूं 'आकिब'
मुहब्बत से घर अपने पलते रहेंगे
