मर्म की बात
मर्म की बात
नन्नू ढिम्पी है दो भाई,
आपस में कर रहे लड़ाई।
मम्मी को दोनों कहते,
मेरी माई मेरी माई।
अपने नन्हें मुन्नों को यूँ
लड़ते देख माँ घबराई।
अपना सारा काम छोड़ माँ,
पास उन्हीं के दौड़ी आई।
अपने बच्चों को छुड़वाकर,
पूँछा क्यो कर रहे लड़ाई।
बात जान करके झगड़े की,
माँ की आंखें भर भर आईं।
तुम दोनों मेरी दुनिया हो
मन में खुशी तुम्ही से आई।
तुम मेरी आँखों के तारे,
मैं तुम दोनों की हूँ आई।
आपस में ना झगड़ा करना
मिलकर रहना दोनों भाई।
प्रेम से सबके मन को जीतो
मर्म की बात मात सिखाई।
नन्नू ढिम्पी तो लगे खेलने
माँ देख देख अति हरषाई।
प्यार यूँ ही करो जीवनभर,
आपस में तुम दोनों भाई।
