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Deepak Kumar

Others

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Deepak Kumar

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मेरी छोटी सी दुनिया

मेरी छोटी सी दुनिया

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उनकी दुनिया से अलग छोटी सी,

दुनिया मेरी भी है।

जी हाँ, बिल्कुल अलग।


कुछ किताबें,

दो-चार चाय के कप,

एक टेबल, कुछ कुर्सियां,

अस्त-व्यस्त, छोटा सा रूम।

लेकिन ठहरिए,

यह केवल कमरा भर नहीं है।

यह सपनों का अजायबघर है।

जहाँ कल्पनाओं की अठखेलियाँ हैं।

कुछ अभिलाषाएं हैं, कुछ अरमान हैं,

कुछ सपने हैं, कुछ अपने हैं।


इन सब के बीच, 

अजीब, विरोधाभास है।

एकांत में कोलाहल,

कोलाहल में एकांत।

 दरवाज़े में खिड़की,

 खिड़की में अदृश्य दरवाज़ा।

जो पुल का काम करता है,

इस दुनिया और उस दुनिया के बीच।



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