मधुमक्खी
मधुमक्खी
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भालू ने खोली दुकान ,
शहद बेचना उसका काम ।
हाथी, बन्दर ,भेड़िया आया ,
उससे कोई शहद न पाया ।।
जा पहुँची शिकायत दरबार,
जंगल का राजा तैयार ।
झटपट फौज भेज बुलबाया ,
भालू थर- थर कंपकंपाया ।।
जंगल में फिर सभा लगाई ,
झटपट उसको सजा सुनाई ।
मधुमक्खी मेहनत है करती,
सबके लिए शहद वो भरती ।।
सब मिलजुल कर खाऐंगे,
सेहत पुष्ट बनाऐंगे ।
कभी न करेंगे वाद विवाद ,
मधुमक्खी को कहें धन्यवाद ।।
