मैं कुछ नहीं।
मैं कुछ नहीं।
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मैं कुछ नहीं एक खाली आसमान हूं
बिखरी हुए दूर तलक फैले बादल को निहारते किसान का विश्वास हूं
कभी एक बूंद गिरी तपती हुई जमीन पर उस जमीन से उड़ती हुई गंध का एहसास हूं
मैं कुछ नहीं एक खाली आसमान हूं।
मैं कुछ नहीं एक वीरान मैदान हूं
दूर तक फैले घास की कोमलता के हरे पन का अंदाज हूं
अपनी ममता की परीक्षा को पूरा करते गौरैयों का तिनका चुनने और जोड़ने का हुनर हूं।
मैं कुछ नहीं एक वीरान मैदान हूं।
