'लूटेरे'
'लूटेरे'
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वहशी और खूंखार लुटेरे रहते हैं,
अब शहरों में यार लुटेरे रहते हैं।
गाली,सुर्खी,नरमी और इक गहरा तिल
दो होंठों पर चार लुटेरे रहते हैं।
इश्क भी ऐसी दौलत है कि ठगने को
गली-गली तैयार लुटेरे रहते हैं।
मैं दरिया में डूबा तो बच जाऊंगा
इस दरिया के पार लुटेरे रहते हैं।
